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Khush Naseeb — cover art

Song lyrics

Khush Naseeb

📜 Lyrics

आप जिनके क़रीब होते हैं वह बड़े ख़ुशनसीब होते हैं जब तबीयत किसी पर आती है मौत के दिन क़रीब होते हैं हां, आप जिनके क़रीब होते हैं वह बड़े ख़ुशनसीब होते हैं मुझसे मिलना फिर आप का मिलना आप किस को नसीब होते हैं दर्दे दिल का इलाज क्या पूछें आप ही तो तबीब होते हैं हां, आप जिनके क़रीब होते हैं वह बड़े ख़ुशनसीब होते हैं ज़ुल्म सहकर जो उफ़ नहीं करते उनके दिल भी अजीब होते हैं दिल जलाने के वास्ते अक्सर साथ उनके रक़ीब होते हैं इश्क़ में और कुछ नहीं मिलता सैकड़ों ग़म नसीब होते हैं नूहؔ की क़द्र कोई क्या जाने कहीं ऐसे अदीब होते हैं आप ही तो तबीब होते हैं... वह बड़े ख़ुशनसीब होते हैं...

💡 Meaning & story

मोहम्मद फारूक द्वारा पुनर्विचार ग़ज़ल "आप जिनके क़रीब होते हैं" की व्याख्या यह एक अत्यंत प्रसिद्ध और क्लासिक उर्दू ग़ज़ल है जिसे प्रख्यात गुरु शायर नूहؔ नारवी (Nuh Narvi) ने रचा है। इस ग़ज़ल में परंपरागत उर्दू काव्य के सभी सुंदर रंग विद्यमान हैं: प्रेम का दर्द, महबूब की समीपता की चाहना, प्रतिद्वंद्वी की उपस्थिति, और आशिक का धैर्य। मूल विचार और विषय (Themes and Meaning) ग़ज़ल का मौलिक विषय प्रेम में मिलने वाली खुशी और इसके साथ जुड़े हुए असीम दर्द का सुंदर विरोधाभास (contrast) है। महबूब की समीपता और प्रेम की तीव्रता: शायर आरंभ में ही यह स्वीकार करता है कि जिन्हें महबूब का साथ और समीपता मिल जाए, वे दुनिया के सबसे भाग्यवान लोग हैं। लेकिन इसके तुरंत बाद प्रेम की कड़वी सच्चाई बयान की गई है कि जब दिल वास्तव में किसी पर आ जाए (यानी सच्चा प्रेम हो जाए), तो मनुष्य का शांति छिन जाती है और प्रेम की तीव्रता में उसे ऐसा लगता है जैसे मृत्यु का समय पास आ गया हो। महबूब मसीहा के रूप में (चिकित्सक): इस ग़ज़ल में प्रेम के दर्द को एक ऐसी बीमारी कहा गया है जिसका इलाज दुनिया के किसी हकीम या डॉक्टर के पास नहीं है। आशिक कहता है कि मेरे दिल के दर्द का इलाज मत पूछो, क्योंकि जिसने यह दर्द दिया है, वही मेरा "चिकित्सक" (healer) है। आशिक का साहस और प्रतिद्वंद्वी (Rival) का दुख: एक सच्चे आशिक की पहचान यह बतائी गई है कि वह प्रेम में मिलने वाले हर दुख और अत्याचार को चुप्पी से सह लेता है और उसके मुँह से "उफ़" तक नहीं निकलती। तथापि, आशिक का दिल जलाने के लिए महबूब के साथ अक्सर 'प्रतिद्वंद्वी' (यानी प्रेम में प्रतिस्पर्धी या शत्रु) नज़र आते हैं, जो कि आशिक के लिए एक बहुत बड़ी परीक्षा होती है। प्रेम का परिणाम और शायर का गर्व: ग़ज़ल के अंतिम भाग में एक सार्वभौमिक सत्य बयान किया गया है कि प्रेम के रास्ते में मनुष्य को और कुछ मिले न मिले, सैकड़ों गम ज़रूर नसीब होते हैं। अपने अंतिम शेर (मक़ता) में शायर नूहؔ अपनी कला पर गर्व करते हुए कहता है कि दुनिया को उनकी क़द्र करनी चाहिए, क्योंकि ऐसे शानदार साहित्यकार और शायर बड़ी मुश्किल से पैदा होते हैं। प्रसिद्ध शेर: आप जिनके क़रीब होते हैं वे बड़े खुश नसीब होते हैं (नूहؔ नारवी) टिप्पणी: कॉपीराइट की वजह से यहाँ ग़ज़ल के केवल कुछ शेर प्रस्तुत किए गए हैं। अगर आप अपने श्रोताओं के लिए इस ग़ज़ल के संपूर्ण बोल (Lyrics) पढ़ना चाहते हैं, तो आप गूगल (Google Search) पर गाने का नाम खोज कर संपूर्ण लिरिक्स प्राप्त कर सकते हैं।