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Farishton se bhi achha — cover art

Song lyrics

Farishton se bhi achha

📜 Lyrics

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था वह मुझसे इंतहाई खुशखफ़ा होने से पहले था फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था वह मुझसे इंतहाई खुशखफ़ा होने से पहले था क्या करते थे बातें ज़िंदगी भर साथ देने की मगर यह हौसला हम में जुदा होने से पहले था फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था वह मुझसे इंतहाई खुशखफ़ा होने से पहले था हकीकत से खयाल अच्छा है बेदारी से ख़्वाब अच्छा तसव्वुर में वह कैसा सामना होने से पहले था अगर मऊदूम को मौजूद कहने में तअम्मुल है तो जो कुछ भी यहाँ है आज क्या होने से पहले था किसी बिछड़े हुए का लौट आना ग़ैर ममकिन है मुझे भी यह गुमाँ इक तजुरबा होने से पहले था फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था वह मुझसे इंतहाई खुशखफ़ा होने से पहले था है यार इस से हमें क्या इंतिहा! के बाद क्या होगा बहुत होगा तो वह जो इबतिदा होने से पहले था बहुत होगा तो वह जो इबतिदा होने से पहले था हाँ, बहुत होगा तो वह जो इबतिदा होने से पहले था...

💡 Meaning & story

मोहम्मद फ़ारूक़ द्वारा रचित अनवर शाओर द्वारा लिखित 1943 इस ग़ज़ल में शायर ने बताया है कि कैसे हालात और वक़्त के बदलने से इंसान के रिश्ते, वादे और खयालात बदल जाते हैं। ख़याल और हक़ीक़त में कितना फ़र्क़ होता है, और इंसान का अंजाम क्या है। यह ग़ज़ल दरअसल ज़िंदगी के तल्ख़ और हक़ीक़त-पसंदाना पहलुओं को बड़ी सादगी से पेश करती है। हर शेर की आसान तशरीह (Couplet by Couplet Explanation) • फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था, वह मुझसे इंतहाई ख़ुश ख़ुदा होने से पहले था o मतलब: शायर कहता है कि जब तक मुझसे कोई ग़लती नहीं हुई थी और मेरे महबूब (या दोस्त) के साथ मेरे तअल्लुक़ात ख़राब नहीं हुए थे, तब तक वह मुझे फ़रिश्तों से भी ज़्यादा नेक और अच्छा समझता था। यानी दुनिया का दस्तूर है कि जब तक आप उनके मेयार पर पूरे उतरते हैं, आप फ़रिश्ते हैं, और एक ग़लती पर आपकी सारी अच्छाइयां भुला दी जाती हैं। • किया करते थे बातें ज़िंदगी भर साथ देने की, मगर यह हौसला हम में जुदा होने से पहले था o मतलब: महब्बत में लोग ज़िंदगी भर साथ निभाने के बड़े-बड़े दावे और वादे करते हैं। शायर कहता है कि हम भी यह बातें करते थे, लेकिन यह दावे और हिम्मत सिर्फ़ इस वक़्त तक थी जब तक हम पर बिछड़ने का वक़्त नहीं आया था। जब हक़ीक़त में जुदाई का वक़्त आया, तो वह सारे दावे धरे के धरे रह गए। • हक़ीक़त से ख़याल अच्छा है, बेदारी से ख़्वाब अच्छा, तसव्वुर में वह कैसा सामना होने से पहले था o मतलब: इंसान जब किसी से नहीं मिला होता, तो अपने तसव्वुर और ख़याल में उस का एक बहुत ख़ूबसूरत ख़ाका बना लेता है। शायर कहता है कि जागने से ख़्वाब अच्छा है और हक़ीक़त से ख़याल बेहतर है। जब तक मेरा इस शख़्स से हक़ीक़त में सामना नहीं हुआ था, वह मेरे ख़यालों में बहुत ही हसीन और बेऐब था। हक़ीक़त अक्सर तसव्वुर से तल्ख़ होती है। • अगर मादूम को मौजूद कहने में तअम्मुल है, तो जो कुछ भी यहां है आज क्या होने से पहले था o मतलब: यह एक फ़लसफ़ाना शेर है। 'मादूम' का मतलब है जो चीज़ मौजूद न हो। शायर कहता है कि अगर तुम्हें इस बात पर यक़ीन नहीं आता कि जो चीज़ मौजूद नहीं वह कैसे हो सकती है, तो ज़रा यह सोचो कि इस कायनात के बनने (इब्तिदा) से पहले यह सब कुछ क्या था? सब कुछ ज़ीरो (अदम) से ही तो वुजूद में आया है। • किसी बिछड़े हुए का लौट आना ग़ैर-ममकिन है, मुझे भी यह गुमां इक तजुरबा होने से पहले था o मतलब: आम तौर पर लोग समझते हैं कि जो एक बार छोड़ कर चला जाए, वह कभी वापस नहीं आता। शायर कहता है कि मुझे भी पहले यही ग़लतफ़हमी (गुमां) थी, लेकिन जब मुझ पर हक़ीक़त खुली और ज़िंदगी ने मुझे तजुरबा दिया, तो मालूम हुआ कि बिछड़ने वाले कभी लौट कर नहीं आते, और जुदाई एक अटल हक़ीक़त है। • है यार, इस से हमें क्या इंतहा के बाद क्या होगा, बहुत होगा तो वह जो इब्तिदा होने से पहले था o मतलब: यह ग़ज़ल का सब से ताक़तवर और गहरा शेर है। शायर कहता है कि ऐ दोस्त! हमें इस बात से डरने या परेशान होने की क्या ज़रूरत है कि मौत के बाद (इंतहा के बाद) क्या होगा? ज़्यादा से ज़्यादा वही तो होगा जो हमारी शुरुआत (पैदाइश) से पहले था। यानी हम मिट्टी और अदम (Nothingness) से आए थे, और अंजाम के बाद वापस इसी मिट्टी और ख़ामोशी में चले जाएंगे। इस लिए अंजाम का ख़ौफ़ बेमानी है। यह ग़ज़ल हमें बताती है कि ज़िंदगी में रिश्ते और हालात अारिज़ी हैं। इस लिए न तो किसी के छोड़ जाने पर ज़्यादा मायूस होना चाहिए और न ही ज़िंदगी के अंजाम से ख़ौफ़ज़दा होना चाहिए, क्योंकि अंजाम दरअसल एक नई शुरुआत या हमारी असल हालत की तरफ़ वापसी है।