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Bari der tak raha — cover art

Song lyrics

Bari der tak raha

📜 Lyrics

वह मुझको दस्तियाब बड़ी देर तक रहा मैं उस का इंतिख़ाब बड़ी देर तक रहा देखा था उस ने मुड़ के मुझे इक नज़र तो फिर आँखों में इज़्तराब बड़ी देर तक रहा खुशबू भी क़ैद हो गई लफ़्ज़ों के जाल में खत में वह इक गुलाब बड़ी देर तक रहा पहले पहल तो इश्क़ के आदाब यह भी थे मैं आप, वह जनाब बड़ी देर तक रहा चेहरे पे फैलने लगी तअबीर की थकन पलकों पे एक ख़्वाब बड़ी देर तक रहा बारिश की तरह मुझ पे बरसता रहा वह शख़्स बन कर वह इक सहाब बड़ी देर तक रहा खुशबू भी क़ैद हो गई लफ़्ज़ों के जाल में खत में वह इक गुलाब बड़ी देर तक रहा पहले पहल तो इश्क़ के आदाब यह भी थे मैं आप, वह जनाब बड़ी देर तक रहा फिर सुबह तक ही छत पे सितारे मुक़ीम थे खिड़की में महताब बड़ी देर तक रहा उस के सवाल पर सभी अलफ़ाज़ मर गए आँसुओं में फिर जवाब बड़ी देर तक रहा गिन गिन के मुझ पे कितने वह इहसान कर गया पूरों पर फिर हिसाब बड़ी देर तक रहा बड़ी देर तक रहा बड़ी देर तक रहा

💡 Meaning & story

रचना: मोहम्मद फारूक द्वारा लेखन: अश्फ़ाक अहमद सैम यह एक अत्यंत सुंदर, मनमोहक और भावनाओं से भरपूर ग़ज़ल है, जिसमें प्रेम के आरंभ, उसकी मिठास, यादों और फिर रिश्ते के अंत की कड़वाहट को बहुत सादगी और गहराई के साथ बयां किया गया है। ग़ज़ल की संपूर्ण व्याख्या वह मुझे उपलब्ध बहुत देर तक रहा मैं उसका चयन बहुत देर तक रहा व्याख्या: इस मतले (पहले शेर) में शायर बीते हुए समय की सुंदरता को याद कर रहा है। वह कहता है कि एक समय था जब मेरा महबूब हर समय मेरे लिए मौजूद था और मैं उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता था। यह शेर उस समय की यादें दिलाता है जब प्रेम अपने शिखर पर था। देखा था उसने मुड़कर मुझे एक नज़र तो फिर आँखों में बेचैनी बहुत देर तक रही व्याख्या: महबूब की एक नज़र का असर बयां किया गया है। बिछड़ते समय या जाते हुए जब महबूब ने केवल एक बार मुड़कर देखा, तो उस एक नज़र ने दिल और दिमाग़ में ऐसी हलचल और बेचैनी मचा दी कि शायर की आँखों की शांति और नींद बहुत देर तक ग़ायब रही। खुशबू भी क़ैद हो गई लफ़्ज़ों के जाल में ख़त में वह एक गुलाब बहुत देर तक रहा व्याख्या: यह शेर पुराने ख़तों और प्रेम की निशानियों का ज़िक्र करता है। महबूब की ओर से आए हुए ख़त में एक गुलाब रखा था जो समय के साथ सूख तो गया, लेकिन उसकी खुशबू उन प्रेम भरे लफ़्ज़ों के बीच हमेशा के लिए क़ैद हो गई। यह पुरानी यादों को सँभालकर रखने का एक सुंदर रूपक है। चेहरे पर फैलने लगी तअबीर की थकन पलकों पर एक ख़्वाब बहुत देर तक रहा व्याख्या: शायर ने अपनी आँखों में महबूब के साथ जीने का एक ख़्वाब बहुत देर तक सजाए रखा। लेकिन जब उस ख़्वाब को हक़ीक़त में बदलने की कोशिश की गई, तो वह सफ़र और दुनिया की परिस्थितियाँ इतनी कठोर थीं कि चेहरे पर इस संघर्ष की थकावट नज़र आने लगी। पहले पहल तो इश्क़ के आदाब यह भी थे मैं आप वह जनाब बहुत देर तक रहा व्याख्या: यह ग़ज़ल का एक बहुत ही प्यारा और हक़ीक़त पर आधारित शेर है। प्रेम की शुरुआत में जो संकोच, औपचारिकता और सम्मान होता है, शायर उसी का ज़िक्र कर रहा है। शुरुआत में दोनों एक दूसरे को बेहद आदब से "आप" और "जनाब" कहकर बुलाते थे। यह प्रेम के प्रारंभिक और मासूम दौर की सुंदर छवि है। बारिश की तरह मुझ पर बरसता रहा वह शख़्स बनकर वह एक सहाब बहुत देर तक रहा व्याख्या: सहाब का मतलब 'बादल' है। इस शेर में महबूब की बेपनाह तवज्जो, प्रेम (या शायद उसके ग़ुस्से और आँसुओं) का ज़िक्र है। वह बादल की तरह आया और शायर पर बहुत देर तक बरसता रहा, यानी अपने जज़्बात को खुलकर और भरपूर अंदाज़े में प्रकट करता रहा। फिर सुबह तक ही छत पर सितारे मुक़ीम थे खिड़की में माहताब बहुत देर तक रहा व्याख्या: शायर ने महबूब के हुस्न को चाँद (माहताब) से तशबीह दी है। महबूब बहुत देर तक खिड़की में बैठा रहा, जिसकी वजह से ऐसा महसूस हुआ जैसे रातभर सितारे भी छत पर ठहरे रहे हों। यह एक लंबी, सुंदर और जागती हुई रात का ज़िक्र है जब महबूब सामने मौजूद हो। उसके सवाल पर सभी लफ़्ज़ मर गए आँसुओं में फिर जवाब बहुत देर तक रहा व्याख्या: महबूब ने कोई ऐसा चुभता हुआ या भावनात्मक सवाल पूछ लिया (शायद जुदाई का कारण या रिश्ते की हक़ीक़त पर) कि शायर के पास बोलने के लिए कोई लफ़्ज़ न बचा। ज़बान ख़ामोश हो गई और आँखों से बहते आँसुओं ने ही बहुत देर तक उस सवाल का जवाब दिया। गिन गिनकर मुझ पर कितने वह अहसान कर गया उँगलियों पर फिर हिसाब बहुत देर तक रहा व्याख्या: इस मक़ता (आखिरी शेर) में रिश्ते के अंत की एक कड़वी हक़ीक़त का बयान है। महबूब जाते जाते अपनी मोहब्बतों और क़ुर्बानियों को अहसान जताकर चला गया, जिसके बाद शायर अपनी उँगलियों के पोरों पर बहुत देर तक उन अहसानों का हिसाब लगाता रहा। यह शेर दिल टूटने और किसी की ओर से अहसान जताने पर पैदा होने वाली तकलीफ़ को ज़ाहिर करता है। लब-ए-लबाब (सार) यह ग़ज़ल प्रेम के आरंभ की मिठास और संकोच से लेकर, रिश्ते के अंत की कड़वाहट और अहसान जताने तक के पूरे सफ़र की एक मनमोहक और सच्ची कहानी है।