📜 Lyrics
मेरी शुरुआत तुम, मेरा अंत तुम
मेरे दिल की धड़कन, होंठों की दुआ तुम
तुम्हारी नज़रों में है मेरी दुनिया
मेरे दिल के हर एक रोग की शिफा तुम
मुझे हर्फ-ए-उल्फत के मायने सिखाकर
बने मेरी चाहत की पहली अदा तुम
मिले तुम तो यूँ वक़्त ठहरा हुआ है
मेरी धड़कनों का हो एक सिलसिला तुम
जो माँगी थी मैंने खुदा से हमेशा
उसी एक दुआ की हो प्यारी अता तुम
मेरे ख़्वाब, मेरी हक़ीक़त हो जानाँ
मेरी रूह के हो गए आशिना तुम
तुम्हारे बिना ज़िंदगी एक खला थी
मेरी ज़ात को मिलने वाला सिला तुम
रहूँगी हमेशा मैं साये में तेरे
कड़ी धूप में एक ठंडी घटा तुम
घनी रात में रोशनी का सफ़र हो
बुझे ताक़-ए-उम्मीद का हो दिया तुम
मेरे दश्त-ए-दिल में बहारों का मौसम
मुहब्बत के गुलशन की ठंडी हवा तुम
खुमार-ए-शब-ए-वसल की चाँदनी हो
मेरी रूह पर प्यार की एक रदा तुम
मेरे हम सफ़र, हम क़दम, हम निशीं हो
मेरी ज़िंदगी का हसीन मुद्दआ तुम
मेरी ज़िंदगी में उजाला तुम्ही से
मेरी तिएरगी में चमकती ज़िया तुम
भँवर में फँसी थी मेरी नाव जब भी
बने मेरी कश्ती का हो नाखुदा तुम
जो सोचा तो बस सोच में तुम ही आए
मेरे दोनों आलम का हो आसरा तुम
यह वादा रहा, अब न बिछड़ेंगे हम तुम
मेरी चाहतों की हो सच्ची वफ़ा तुम
तुम्हारे लिए ही धड़कता है यह दिल
मेरी बेक़रारी की हो इल्तिजा तुम
अलिफ़ से हो ता या, बस एक नाम तेरा
मुहब्बत के रस्ते का हो रहनुमा तुम
मेरी शायरी में, मेरी हर ग़ज़ल में
धड़कती हुई एक हसीन सी सदा तुम
धड़कती हुई एक हसीन सी सदा तुम...
💡 Meaning & story
गीत का परिचय: मेरी शुरुआत तुम, मेरा अंत तुम - रचित और लिखित मोहम्मद फारूक द्वारा
यह गीत दो प्रेमियों के बीच एक गहरे और सच्चे भावनाओं का सबसे शुद्ध अभिव्यक्ति है। इस गीत की आत्मा इसी एक विचार में बसी है कि इस विस्तृत और उथल-पुथल से भरी दुनिया में, इन दोनों के लिए एक दूसरे की सत्ता के सिवा और कुछ भी अर्थ नहीं रखता।
एक खूबसूरत दोगान (Duet) के रूप में, यह शब्द एक ऐसे जोड़े की कहानी सुनाता है जो एक दूसरे को अपनी ज़िंदगी का आरंभ, समाप्ति और संपूर्ण ब्रह्मांड मानते हैं। पुरुष और महिला की आवाज़ों में यह दिलकश संवाद इस बात का स्वीकार है कि उनकी दुनिया एक दूसरे की मौजूदगी से ही पूर्ण होती है।
उर्दू के शास्त्रीय रोमांटिक शायरी और स्पेनिश गिटार की मनमोहक धुनों का यह अनोखा मिश्रण प्रेम की सरलता और उसकी असीम तीव्रता को एक साथ प्रस्तुत करता है। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि वफ़ा का वह सच्चा वचन है जो बताता है कि प्रेम के इस लंबे सफ़र में, मंज़िल सिर्फ़ और सिर्फ़ एक दूसरे का साथ है, और इसके अलावा उन्हें इस दुनिया से कुछ नहीं चाहिए।