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Sitaron se aagay — cover art

Song lyrics

Sitaron se aagay

📜 Lyrics

तारों से आगे जहाँ और भी हैं अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी हैं तही ज़िंदगी से नहीं ये फिज़ाएँ यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं क़नाअत न कर आलम रंग ओ बू पर चमन और भी आशियाँ और भी हैं अगर खो गया इक नशेमन तो क्या ग़म मक़ामात आह ओ फगाँ और भी हैं तारों से आगे जहाँ और भी हैं! अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी हैं! तारों से आगे जहाँ और भी हैं! तो शाहीन है परवाज़ है काम तेरा तिरे सामने आसमाँ और भी हैं इसी रोज़ ओ शब में उलझकर न रह जा कि तेरे ज़माँ ओ मकाँ और भी हैं तारों से आगे जहाँ और भी हैं! अभी इश्क के इम्तिहाँ और भी हैं! गए दिन कि तनहा था मैं अंजुमन में... यहाँ अब मिरे राज़दाँ और भी हैं... तो शाहीन है परवाज़ है काम तेरा... तिरे सामने आसमाँ और भी हैं... तारों से आगे... जहाँ और भी हैं!

💡 Meaning & story

नज़्म का सारांश: तारों से आगे जहाँ और भी हैं यह अल्लामा इक़बाल की एक अत्यंत जोशीली और आशा से भरी ग़ज़ल है जो इंसान को निरंतर संघर्ष, ऊँची उड़ान और ब्रह्मांड की विजय का पाठ देती है। मूल संदेश और व्याख्या: असीम संभावनाएँ और खोज: इक़बाल कहते हैं कि हमारा लक्ष्य केवल ये नज़र आने वाले तारे और आसमान नहीं हैं, बल्कि इस ब्रह्मांड में खोजने और जीतने के लिए और भी बहुत सी दुनियाएँ मौजूद हैं। सच्चे जुनून (प्रेम) की परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती, जीवन निरंतर आगे बढ़ने का नाम है। संतुष्टि की निंदा: वह इंसान को केवल वर्तमान हालात और इस भौतिक दुनिया (रंग और सुगंध का संसार) पर संतुष्ट होकर बैठ जाने से रोकते हैं। उनके विचार में अगर आपने एक मंज़िल पा ली है, तो वहीं रुक न जाएँ, क्योंकि अभी और भी कई बाग और घोंसले आपकी प्रतीक्षा में हैं। असफलता पर साहस न खोना: अगर रास्ते में कोई एक घोंसला (उद्देश्य) छिन भी जाए या कोई नुकसान हो जाए तो निराश नहीं होना चाहिए। रोने-धोने और साहस हारने की बजाय नई शुरुआत करनी चाहिए क्योंकि संघर्ष के लिए अभी और भी कई मैदान बाकी हैं। शाहीन का प्रतीक: इक़बाल इंसान को 'शाहीन' (बाज़) से तुलना देते हैं जिसका काम हमेशा ऊँची उड़ान भरना है। वह सीख देते हैं कि रोज़मर्रा की साधारण उलझनों में क़ैद होकर न रहो, अपनी सोच को विस्तार दो क्योंकि तुम्हारी उड़ान के लिए नए समय और स्थान मौजूद हैं। नए साथी और हमविचार: अंत में वह एक सकारात्मक आशा दिलाते हैं कि इंसान इस यात्रा में अकेला नहीं रहता। अगर पुराने साथी छूट भी गए हैं तो इस नई और विशाल दुनिया में आगे बढ़ने पर नए हमविचार, दोस्त और विश्वासपात्र भी मिल जाते हैं। अल्लामा इक़बाल का यह कलाम हमें सिखाता है कि ज़िंदगी कभी हार मानने या एक जगह रुक जाने का नाम नहीं है। चाहे कितनी भी कामयाबियाँ मिल जाएँ या नाकामियाँ रास्ते में आएँ, हमारी उड़ान हमेशा एक शाहीन की तरह ऊँची होनी चाहिए। ब्रह्मांड के रहस्यों को खोजना और निरंतर आगे बढ़ना ही असली ज़िंदगी है। आशा है आपको इस कलाम का यह नया संगीतात्मक अंदाज़ पसंद आएगा!