💡 Meaning & story
صुबह का दृश्य: शायर गहरी नींद में सोने वालों को आवाज़ देकर जगा रहा है कि रात गुज़र चुकी है और सुबह की रोशनी फैलने लगी है। सूरज निकलने की वजह से चाँद की चमक मंद पड़ गई है और हर तरफ़ उजाला फैल रहा है।
फ़ित्रत की बेदारी: सुबह की ठंडी हवाएँ चल रही हैं, फूल ख़ुशी से झूम रहे हैं। परिंदे जाग चुके हैं; कोयल और फ़ाख़्ता अपने ख़ास और मीठे अंदाज़े में गीत गा रहे हैं। दरख़्तों की शाख़ों पर परिंदों की चहचहाहट गूँज रही है, बाग़ों में कलियाँ खिल गई हैं और नहरें बह रही हैं। जानवर, जैसे गाएँ और भैंसें, भी घास चरने निकल आए हैं।
नसीहत और पैग़ाम: आख़िर में शायर एक बच्चे "अहमद" का नाम लेकर (जो कि इस्तिआरे के तौर पर हर नौजवान या क़ारी के लिए है) उसे कहता है कि बिस्तर छोड़ो, मुँह हाथ धोकर कपड़े पहनो और बाहर निकलकर मैदानों और बाग़ों की सैर करो। नज़्म का इख़्तिताम इस ख़ूबसूरत नसीहत पर होता है कि "वक़्त को खोना या बर्बाद करना अपने ऊपर ज़ुल्म करने के मुतरादिफ़ है"।
Lyrics & Meaning