💡 Meaning & story
हफीज जालंधरी साहब की यह खूबसूरत नज़्म "बारिश के बाद का मौसम" कुदरत के एक दिलकश और सहरानगेज़ मंज़र की अक्सी करती है
नज़्म का खुलासा (Summary)
इस नज़्म में शायर ने बरसात के ख़तम होने के बाद फितरत में आने वाली खुशगवार तब्दीली और आसमान पर चमकने वाली खूबसूरत धनक (कौस-ए-क़ुज़ह) का नक़्शा खींचा है। बारिश बरसने के बाद पूरी कायनात साफ़ और धुली धुली नज़र आती है। सूरज की किरणें दोबारा चमकती हैं, परिंदे खुशी के गीत गाते हैं और ज़मीन पर हीरे मोतियों की तरह चमकते पानी के क़तरे बिखर जाते हैं। इस खूबसूरत माहौल में अचानक आसमान पर सात रंगों की एक जादुई कमान (धनक) नुमायाँ होती है जो अल्लाह तआला की कुदरत का एक अज़ीम शाहकार है। लेकिन यह नज़ारा जितना खूबसूरत होता है, उतना ही अारिज़ी भी होता है, और देखते ही देखते यह धनक हवा में ग़ायब हो जाती है।
तफ़सीली तशरीह (Explanation)
1. माहौल की सफ़ाई और निखार: नज़्म के आग़ाज़ में शायर कहते हैं कि बादल खूब बरसने के बाद अब छंट चुके हैं और मौसम बिलकुल साफ़ हो गया है। बारिश के इस पानी ने बाग़ के एक एक पत्ते और हर डाली को धो कर उजागर कर दिया है। ऐसा मालूम होता है जैसे सिर्फ ज़मीन ही नहीं बल्कि पूरा नीला आसमान भी धुल कर साफ़, गहरा और दिलकश हो गया है।
2. सूरज का दोबारा राज और परिंदों की चहचहाहट: ज्यों ही बादलों का पर्दा हटता है, सूरज की सुनहरी किरणों को ज़मीन पर आने का रास्ता मिल जाता है। शायर ने सूरज को एक बादशाह से तशबीह दी है जो बादल हटते ही अपनी सल्तनत (ज़मीन) पर दोबारा मुहब्बत और जलाल से निगाह डाल रहा है। धूप निकलने से घास पर मौजूद पानी के क़तरे इस तरह चमक रहे हैं जैसे सच्चे हीरे और मोती बिखरे हों। इस खुशगवार और तरोताज़ा माहौल में दरख़्तों की हरी शाखें और रंग बिरंगे फूल एक अलग ही बहार का मंज़र पेश कर रहे हैं, और परिंदे इस खूबसूरत मौसम से नहाल हो कर हर तरफ़ बरसात के गीत (रागनी) गाते फिर रहे हैं।
3. धनक का जादू और कुदरत का नज़ारा: मौसम के इस अरूज पर शायर का ध्यान आसमान की तरफ़ जाता है जहाँ दरख़्तों की ओट से एक हैरतअंगेज़ मंज़र दिखाई देता है। आसमान पर सात रंगों की एक खूबसूरत और शोख़ कमान बनी हुई है, जिसे देख कर अक़्ल हैरान रह जाती है कि यह कोई जादू है या हक़ीक़त! शायर इस अज़ीम मुसव्विर (अल्लाह तआला) की तारीफ़ किए बिना नहीं रह पाता जिसने इतने खूबसूरत रंग इस तरह यकजा कर दिए हैं कि देखने वाले की आँखें वहीं टिक कर रह जाती हैं। साइंसी और क़ुदरती इतबार से शायर बताता है कि यह पानी के इन नन्हे क़तरों का कमाल है जिन पर जब सूरज की शाइयें (अक्स) पड़ती हैं तो यह रंगीन कमान बन जाती है।
4. इख़तेताम और मंज़र का ग़ायब होना: नज़्म के आख़िर में शायर एक सची हक़ीक़त को बयान करता है कि यह जादुई नज़ारा हमेशा क़ायम रहने वाला नहीं है। देखते ही देखते वह प्यारी धनक मदहम होना शुरू हो जाती है और देखते ही देखते आसमान के नीलेपन और हवा में इस तरह हल हो जाती है कि वहाँ कुछ बाक़ी नहीं रहता। शायर कहता है कि अब आँखें मिल मिल कर देखने का कोई फ़ायदा नहीं, क्योंकि वह खूबसूरत समाँ अब रुख़्सत हो चुका है, लेकिन अपने पीछे एक मिट मिटाता और यादगार एहसास छोड़ गया है।
Lyrics & Meaning