Farooq Music Lyrics & Meaning
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Tamasha — cover art

Song lyrics

Tamasha

📜 Lyrics

وह बुलाएं तो क्या तमाशा हो हम न जाएं तो क्या तमाशा हो यह किनारों से खेल खेलने वाले डूब जाएं तो क्या तमाशा हो वह जो कहते हैं हम तुम्हारे हैं मुकर जाएं तो क्या तमाशा हो तेरी सूरत जो इत्तिफाक से हम भूल जाएं तो क्या तमाशा हो आज हम भी तेरी वफाओं पर मुस्कराएं तो क्या तमाशा हो तेरी यादों के सूखे फूलों को फिर सजाएं तो क्या तमाशा हो वह जो हम को गंवा कर बैठे हैं याद आएं तो क्या तमाशा हो बंदा परवर जो हम पर गुजरी है हम बताएं तो क्या तमाशा हो हर्फ़े हक़ पर जो मसलहत ठहरी लब हिलाएं तो क्या तमाशा हो ग़म की इस तपती हुई बस्ती में मुस्कराएं तो क्या तमाशा हो जिन चराग़ों से रोशनी कम है बुझ ही जाएं तो क्या तमाशा हो वक्त की चंद साइतें है साग़रॽ लूट आएं तो क्या तमाशा हो

💡 Meaning & story

وह बुलाएं तो क्या तमाशा हो / हम न जाएं तो क्या तमाशा हो यह किनारों से खेलने वाले / डूब जाएं तो क्या तमाशा हो वह जो कहते हैं हम तुम्हारे हैं / मुकर जाएं तो क्या तमाशा हो तेरी सूरत जो इत्तेफाक़ से हम / भूल जाएं तो क्या तमाशा हो आज हम भी तेरी वफाओं पर / मुस्कराएं तो क्या तमाशा हो तेरी यादों के सूखे फूलों को / फिर सजाएं तो क्या तमाशा हो वह जो हम को गंवा के बैठे हैं / याद आएं तो क्या तमाशा हो बंदा-परवर जो हम पर गुज़री है / हम बताएं तो क्या तमाशा हो हर्फ़-ए-हक़ पर जो मसलहत ठहरी / लब हिलाएं तो क्या तमाशा हो ग़म की इस तपती हुई बस्ती में / मुस्कराएं तो क्या तमाशा हो जिन चिरागों से रोशनी कम है / बुझ ही जाएं तो क्या तमाशा हो वक़्त की चंद साअतें है साग़रؔ / लूट आएं तो क्या तमाशा हो