💡 Meaning & story
وह बुलाएं तो क्या तमाशा हो / हम न जाएं तो क्या तमाशा हो
यह किनारों से खेलने वाले / डूब जाएं तो क्या तमाशा हो
वह जो कहते हैं हम तुम्हारे हैं / मुकर जाएं तो क्या तमाशा हो
तेरी सूरत जो इत्तेफाक़ से हम / भूल जाएं तो क्या तमाशा हो
आज हम भी तेरी वफाओं पर / मुस्कराएं तो क्या तमाशा हो
तेरी यादों के सूखे फूलों को / फिर सजाएं तो क्या तमाशा हो
वह जो हम को गंवा के बैठे हैं / याद आएं तो क्या तमाशा हो
बंदा-परवर जो हम पर गुज़री है / हम बताएं तो क्या तमाशा हो
हर्फ़-ए-हक़ पर जो मसलहत ठहरी / लब हिलाएं तो क्या तमाशा हो
ग़म की इस तपती हुई बस्ती में / मुस्कराएं तो क्या तमाशा हो
जिन चिरागों से रोशनी कम है / बुझ ही जाएं तो क्या तमाशा हो
वक़्त की चंद साअतें है साग़रؔ / लूट आएं तो क्या तमाशा हो
Lyrics & Meaning