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Time in A bottle — cover art

Song lyrics

Time in A bottle

📜 Lyrics

काश वक़्त को एक बोतल में, मैं क़ैद कभी कर पाता पहला काम जो मैं करता, हर लम्हा ही बचाता हर दिन को मैं रोक के रखता, जब तक है यह दुनिया सिर्फ तुम्हारी चाहत में, मैं हर पल को सजाता लेकिन वक़्त तो मुट्ठी में है, रेत की सूरत गिरता कौन है जिस ने पूरा अपने, दिल का अरमान पाया? मैं ने दुनिया देख ली लेकिन, तुम सा कोई न पाया तुम हो वह जिस के हमराह, मैं ने जीवन पाया काश कि दिन यह थाम जाते और ख़्वाहिश सच हो जाती काश मिरे अलफाज़ की ताक़त, सपनों को ले आती इक इक दिन मैं जोड़ के रखता, जैसे कोई ख़ज़ाना फिर वह वक़्त तुम्हारे संग ही, ज़िंदगी बन जाती लेकिन वक़्त तो मुट्ठी में है, रेत की सूरत गिरता कौन है जिस ने पूरा अपने, दिल का अरमान पाया? मैं ने दुनिया देख ली लेकिन, तुम सा कोई न पाया तुम हो वह जिस के हमराह, मैं ने जीवन पाया गर ख़्वाहिश का डिब्बा होता, ख़्वाबों से भरा होता और वह सपने जिन को मैं ने, कभी अधूरा पाया वह सब ख़ाली होते, बस इक तेरी याद ही रहती तुझ को पा कर मैं ने गोया, सब कुछ ही पा लिया है

💡 Meaning & story

नज़्म: "वक़्त अगर एक बोतल में होता" – मुकम्मल तशरीह मरकज़ी ख़्याल (Theme) इस नज़्म का मरकज़ी ख़्याल "वक़्त की बे-सबात" और "मुहब्बत की लाफ़ानियत" है। इंसान हमेशा से यह तमन्ना करता आया है कि वह अपनी ज़िंदगी के ख़ूबसूरत तरीन लमहों को रोक ले, ख़ास तौर पर वह लमहे जो वह अपने प्यारे के साथ गुज़ारता है। यह नज़्म इस नामुमकिन ख़्वाहिश का एक जज़्बाती इज़हार है। बंद-वार तशरीह पहला बंद: वक़्त को क़ैद करने की तमन्ना शायर कहता है कि अगर वक़्त कोई माद्दी चीज़ होती जिसे किसी बोतल में बंद किया जा सकता, तो मैं अपनी ज़िंदगी के तमाम क़ीमती लमहों को इसमें जमा कर लेता। हम अक्सर दौलत और चीज़ें जमा करते हैं, लेकिन शायर का सब से बड़ा असाथ वह "वक़्त" है जो वह अपने महबूब के साथ गुज़ारना चाहता है। वह अबदियत (Eternity) तक सिर्फ़ इन लमहों को जीना चाहता है। दूसरा बंद: अल्फ़ाज़ और ख़्वाहिशों का टकराव यहाँ इंसानी बे-बसी का ज़िक्र है। शायर कहता है कि काश मेरे अल्फ़ाज़ में इतनी ताक़त होती कि वह मेरी ख़्वाहिशों को हक़ीक़त बना सकते। हम जानते हैं कि वक़्त किसी के लिए नहीं रुकता, लेकिन शायर की "ख़ज़ाना" जमा करने की हसरत दरअसल इन यादों को हमेशा के लिए महफ़ूज़ रखने की तड़प है जो लमहा-बह-लमहा हाथ से फिसल रही हैं। तीसरा बंद: वक़्त की बे-रहमी और सच्ची तलाश यह इस नज़्म का सब से ताक़तवर हिस्सा है। वक़्त को "रेत" से तशबीह दी गई है—जिसे जितना मज़बूती से पकड़ो, वह उतना ही तेज़ी से उंगलियों के दरमियान से निकल जाती है। शायर इक़रार करता है कि इसने पूरी दुनिया घूमी, बहुत से तजुरबे किए, लेकिन अब इसे यह अहसास हो चुका है कि इसकी ज़िंदगी का असल सफ़र और मक़सद सिर्फ़ एक शख़्स (महबूब) के गिर्द घूमता है। आख़िरी बंद: ख़्वाबों का ख़ाली डिब्बा और तुम शायर तसव्वुर करता है कि अगर इसके पास ख़्वाहिशों का कोई डिब्बा होता, तो वह ख़ाली होता। क्यों? क्योंकि इसकी ज़िंदगी की तमाम अधूरी ख़्वाहिशें और ख़्वाब तुम्हारे आने से पूरे हो गए हैं। अब इसे किसी नई तमन्ना की ज़रूरत नहीं, सिर्फ़ तुम्हारा साथ और तुम्हारी याद ही इसके लिए काफ़ी है। सामेईन के लिए पैग़ाम (Closing Note) यह नज़्म हमें यह अहसास दिलाती है कि ज़िंदगी में सब से क़ीमती चीज़ "वक़्त" है और इस वक़्त का बेहतरीन इस्तेमाल उन लोगों के साथ है जिन से हम मुहब्बत करते हैं। चूँकि हम वक़्त को बोतल में बंद नहीं कर सकते, इसलिए ज़रूरी है कि हम हर लमहे की क़दर करें इस से पहले कि वह रेत बन कर उड़ जाए।