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Urtay Parindey — cover art

Song lyrics

Urtay Parindey

📜 Lyrics

ऊँचाई पर उड़ते परिंदों गवाह रहना, तुम जानते हो मेरा हाल क्या है चमकते हुए सूर्य गवाह रहना, तुम जानते हो मेरा हाल क्या है हवा के सुलभ और नरम झोंके, तुम जानते हो मेरा हाल क्या है यह एक नई सुबह है, यह एक नया दिन है यह एक नई जिंदगी, अब मुकद्दर हुई कैसी दिलकश यह घड़ी है, मैं कितना खुश हूँ समुद्र की लहरों में पलती वह मछली, तुम जानती हो मेरा हाल क्या है पहाड़ों से गिरती वह आजाद नदी, तुम जानती हो मेरा हाल क्या है शाख पर वह खिलती हुई नन्ही कली, तुम जानती हो मेरा हाल क्या है फ़ज़ाओं में उड़ते वह सुनहरी पतंगें, तुम समझते हो मेरा मुद्दा क्या है वह रंगों से खेलती हुई सब तितलियाँ, तुम समझती हो मेरा मुद्दा क्या है थकन के बाद वह पुरसुकून नींद, मेरा यही तो मुद्दा है यह दुनिया पुरानी थी, अब नई हो गई यह आलम अब मेरे लिए बेखौफ़ और बेबाक हो गया ऐ तारो! तुम्हारी चमक जानती है, मेरा हाल क्या है देवदार के बन की महक जानती है, मेरा हाल क्या है कि अब मेरी रूह आजाद है, खुद-मुख़्तार है यह एक नई सुबह है यह एक नया दिन है मैं कितना शादमान हूँ!

💡 Meaning & story

नज़्म का खुलासा: احساسِ नव (अच्छा महसूस करना) तारीफ़: यह नज़्म दरअसल इंसानी रूह की उस कैफ़ियत की तर्जुमानी करती है जब वह तमाम जंजीरें तोड़ कर एक नई आज़ादी और ख़ुशी का तजुर्बा करती है। यह महज़ अल्फ़ाज़ नहीं बल्कि एक नई शुरुआत का एलान है। मर्कज़ी ख़्याल: नज़्म का हर मिसरा क़ुदरत के मुख़्तलिफ़ मनाज़िर—जैसे बुलंदी पर उड़ते परिंदे, चमकता सूरज़, आज़ाद बहती नदियाँ और ख़ुशबू बिखेरते देवदार के दरख़्त—को गवाह बना कर यह बताता है कि इंसान अब फ़ितरत के साथ हम आहंग हो चुका है। अहम् निकात: • नई शुरुआत: यह नज़्म इस अहसास को उजागर करती है कि हर गुज़रता लमहा हमें एक नई ज़िंदगी, एक नई सुबह और एक नए दिन का मौक़ा देता है। • आज़ादी का जश्न: शायर अपनी रूह की आज़ादी का जश्न मना रहा है, जहाँ अब कोई ख़ौफ़ या पुरानी दुनिया की तल्खियाँ बाक़ी नहीं रहीं। • ख़ुशी और शादमानी: परिंदों, तितलियों और सितारों का ज़िक्र इस बात की अलामत है कि कायनात की हर शै इस ख़ुशी में बराबर की शरीक है। सामेईन के लिए पैग़ाम: इस नज़्म को पेश करने का मक़सद यह है कि हम अपने अंदर छिपे इस जोश और वलवले को दोबारा बेदार करें जो ज़िंदगी की मसरूफ़ियत में कहीं खो गया है। यह पैग़ाम है कि हम माज़ी को पीछे छोड़ कर एक "बेबाक" और "ख़ूबसूरत" दुनिया की तरफ़ क़दम बढ़ाएँ जहाँ हम कह सकें: "हाँ, अब मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ!"